बारिश की बेरुखी से पीले पड़ने लगे धान
यूरिया छिड़काव भी अटका, किसान चिंतित
सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र में बारिश की कमी अब धान की फसल पर साफ दिखाई देने लगी है। खेतों में नमी खत्म होने से धान के पौधे पीले पड़ रहे हैं और कई जगह खेतों में दरारें भी पड़ गई हैं।

किसान यूरिया छिड़काव के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
इस बार मानसून की अनियमितता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रोपाई के समय बारिश में देरी हुई और अब पिछले चार दिनों से वर्षा न होने के कारण धान की फसल प्रभावित होने लगी है। जून से अब तक जिले में 557.4 मिमी के सापेक्ष केवल 346.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 38 प्रतिशत कम है।
बारिश न होने से खेतों की नमी समाप्त हो रही है। धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं और कई खेतों में दरारें दिखाई दे रही हैं। इस समय धान की फसल में यूरिया डालना जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नमी के बिना यूरिया का छिड़काव प्रभावी नहीं हो सकता।
संपन्न किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रहे हैं, जबकि अधिकांश किसान बारिश की आस लगाए बैठे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के विज्ञानी डॉ. मार्कण्डेय सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि यदि संभव हो तो हल्की सिंचाई करके खेतों में नमी बनाए रखें, तभी यूरिया का छिड़काव लाभकारी होगा।
वहीं जिला कृषि अधिकारी रवि शंकर पाण्डेय ने बताया कि फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यदि सूखे जैसी स्थिति बनती है तो किसानों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। सुधीर पाठक, हरे कृष्ण पाण्डेय, फूलचंद यादव और सूर्य प्रकाश सिंह सहित कई किसानों ने चिंता जताई कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।



